सकारात्मक सुविचार
This blog is all about a compilation of positive vibes flowing out from the writer's mind.

" दूरदर्शिता, सुचिता, पारदर्शिता मानव का सर्वश्रेष्ठ गुण होता है यदि आप में यह है तो आपकोआगे ले जाने से कौन रोक सकता है । "
"
आप जहां पर भी फोकस करोगे उतना ही अच्छाइयों या और बुराइयों से वाकिफ हो जाओगे क्योंकि मस्तिष्क के कार्य करने का मूलभूत सिद्धांत यही है "
लेखक
" जब आप चीजों को देखते हैं तो वह एक चीज होती है,
फिर से देखते हैं तो वह चीज और उसकी विशेषताएं नजर आती हैं,
फिर से देखते हैं तो उसमें बुराइयां भी नजर आने लगती हैं
और यदि फिर से देखेंगे तो पाएंगे कि इसकी सुचिता अन्य से अलग कैसे है
यदि फिर से देखेंगे तो उस वस्तु से या तो आप प्यार करने लगेंगे या फिर घृणा। "
लेखक
" हमारा कोई शत्रु इस जहां में है तो वह हम खुद ही हैं, अन्यथा कोई नहीं। अतः खुद से संघर्ष कर अपनी चाहत को प्राप्त करो। "
लेखक
"
छत बनाना बुरी बात नहीं है परंतु इसके लिए पहले नींव , फिर स्तंभ बनाने होंगे ।
बेचारी नींव तो दिखेगी भी नहीं, आज लोग सोशल मीडिया तथा अन्य संचार
माध्यमों से छत को देख कर पाना तो चाहते हैं परंतु नींव या स्तंभ बनाने के
विषय में या तो सोचते नहीं है, या फिर आधा अधूरा l
परिणाम यह है कि समय के साथ छत तो गिरेगी ही और आप अनायास दुखी हो जाएंगे
"
लेखक
" मैं मानता हूँ यदि कोई इंसान अपने अतीत का बारीकी से तथा ईमानदारी से अध्ययन करें तो उसे वह पूँजी मिलेगी, जो पाने के लिए वह हर जगह दूसरों पर निर्भर होना चाहता है या उसे होना पड़ता है पर हकीकत में कोई मुश्किल से ऐसा ही करता है "
लेखक
" समय और परिस्थितियां किसी की दास नहीं है या है यह कह पाना मुश्किल है परंतु कर्मों से परिस्थितियां उत्पन्न होंगी ही, चाहे आप उसे स्वीकार करो या अस्वीकार्य करो । सही बताएं यह विकल्प भी हमारे हाथ में नहीं और यह भी हमारा कर्म ही निर्धारित करता है। "
लेखक
" आपको क्या लगता है कि कुछ करें या ना करें, इससे किसी संस्थान या संसार को कोई फर्क पड़ता है, इसके उलट फर्क सिर्फ तुम्हें पड़ेगा क्योंकि आप क्या होंगे यह सिर्फ आप ही निश्चित करेंगे ।"
लेखक
" अपने मन की चाहत पूरी होने पर कृतज्ञ रहिए, यह अच्छी बात है परंतु ऐसा ना हो कि आप इतना झुक जाए कि लोग आपको पुनः कृतज्ञ होने का मौका ही ना दें ।"
" पढ़ाई एक गेट पास है जबकि व्यवहारिक ज्ञान जीवन जीने की कला ।
दुर्भाग्य से दूसरा आज के मानव में है ही नहीं।"
सादर
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