जिंदगी का मकसद क्या है यह...

Numerous human beings have uncountable thoughts, desires, and activities thus this blog deals few types of human beings in our society.

May 20, 2023 - 13:06
Jul 13, 2023 - 22:34
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जिंदगी का मकसद क्या है यह...
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जिंदगी का मकसद

 

जिंदगी का मकसद क्या है यह एक जटिल शब्दांश है जो कि व्यक्ति से व्यक्ति, समाज से समाज, तथा देश से देश के लिए बिल्कुल अलग हो सकता है। जिंदगी के हर एक पल में, एक व्यक्ति विशेष में भी इसका परिवर्तन होता रहता है। वह व्यक्ति की अपनी सोच, स्थिति तथा उससे घिरे कारणों से सीधे जुड़ा रहता है। हर किसी की सोच को एक शब्दांश में पिरोना ना तो तार्किक है और ना ही संभव, फिर भी लेखक अपनी क्षमता के अनुसार ऐसा करने का प्रयास करता है।

सामान्यतया, हमें सफलता मिलती है जो अपने द्वारा इच्छित सोच के परिणाम स्वरुप हो सकती है में हम उन अगणित कारणों को भूल जाते हैं जिसके अनवरत प्रयासों का वह प्रतिफल है। जिसका आज आपको उपभोग करने का अवसर मिला है अपितु हम उसे अपनी कमाई या मेहनत का नाम दे देते हैं। क्षण भर के लिए उसी समय यदि हम यह सोचते हैं कि परिणाम विपरीत को आता तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती । समय के उस पड़ाव में सोचने वाला व्यक्ति आगे बढ़ने का परिचय सिर्फ परिचय देता है अपितु अपनी महानता का भी।

एक साधारण मानव जो गृहस्थ जिंदगी बिता रहा है का मकसद अधिक से अधिक, या पर्याप्त पैसे कमाना और एक जीवन पद्धति में खुद को ढालना है जिससे तथाकथित समाज में उसकी प्रशंशा का कोई कारण  छूट ना जाए। वह बच्चा पैदा करने, उसकी देखभाल , शिक्षा दीक्षा, और फिर उसकी आजीविका में अपने समय बिताने को या तो अपना उद्देश्य बना लेता है या फिर अपना कर्तव्य मान लेता है। जीवन के चक्कर में उलझें मानव का चरित्र अलग-अलग प्रकार का दिखाई पड़ता है-

प्रथम प्रकार में सामान्यतः लालच होती हैं आसमान को छूने की, परंतु जमीन से कटने की भी नहीं चाहते हैं । ऐसे लोग एक साधारण जिंदगी जीने के रास्ते को चुनते हैं उनकी हर एक महत्वाकांक्षा उनकी परिस्थितियों के अनुसार भले ही बदल जाए परंतु उनकी मूल सोच सम्भवतः समान ही बनी रहती है। ऐसे लोग हो सकता है कि बड़ी विपदा की घड़ी में खुद को तोड़ने और समस्याओं से दबकर निर्णय ले लें।

द्वितीय प्रकार के मनुष्य प्रथम से इस बात से भिन्न होते हैं कि उनकी दूरदर्शिता प्रथम से ज्यादा तथा उस सोच को आगे बढ़ाने की क्षमता सामान्य से अधिक होती है । जड़ों से जुड़ा रहना आसमा को पाने की चाहत में समाप्त हो जाती है। परिणाम यह होता है कि सोच के साथ रास्ते पर भी निकल पड़ते हैं और समस्याओं का सामना एक हद तक करते हैं दुखों को झेलते रहते हैं और मकसद की तरफ बढ़ना नहीं छोड़ते । फिर भी फिर उचित परिस्थितियां यदि न मिलें तों शायद छोड़ देते हैं।

तीसरा और सबसे अलग प्रजाति यह है मकसद यदि वना लिए तो समस्याओं को अवसरों की तरह देखने का नजरिया बना लेते हैं। ऐसे में वह छीनी और हथौड़ी से हिमालय को तोड़ने जैसी बात भी करते हैं ।और करके दिखा भी देते हैं। ऐसे लोग जिस भी क्षेत्र में जाते हैं जिंदगी में कुछ ना कुछ नया देकर ही जाते हैं चाहे बाधाएँ कितनी भी क्यों ना हो और उसी को जिंदगी का मकसद बना लेते हैं।

चतुर्थ प्रकार की मानव प्रजाति है जो तथाकथित मध्यम और उच्च वर्ग है या अपने को ऐसा मानते हैं ऐसे लोगों की जिंदगी विलासिता से शुरू होकर बहुधा वही जाकर खत्म हो जाती है ऐसे में उनके लिए अपनी शान शौकत के सिवा जिंदगी की अन्य परिभाषा नहीं है भारत जैसे देश में इनकी प्रजाति अल्पसंख्यक है इनकी सोच ही सीमित होने का दायरा इस कदर कम होता है कि लोगों के बात व्यवहार, खानपान से लेकर दिनचर्या में भी परिलक्षित होता है इनके जीवन में विश्वास की कमी मूल रूप में देखी जा सकती है। इनके जीवन के मकसद बड़े बड़े होते हैं और इन को प्राप्त करने की क्षमता भी होती है परंतु इनके सभी रास्ते ज्यादातर आत्म केंद्रित होते हैं और इनसे ज्यादा अच्छे की उम्मीद नहीं की जा सकती है ऐसी प्रवृत्ति मुख्यतयः पूंजीवाद को बढ़ावा देती हैं ना कि समाजवाद को ।

 

पंच प्रजाति तथा कथित बुद्धिजीवियों की है जिंदगी के हर मोड़ पर ऐसों का साक्षत्कार तो हो ही जाता है जो या तो पाखंड पर जीवित हैं या दिखावा पर । जिंदगी की गैलरी बड़ी अद्भुत है जहाँ हर पल अनोखो की कमी तो होती नहीं है ऐसे में इस प्रजाति की महत्ता प्रतिस्थापित हो जाती है जब किसी विषय पर चर्चा की जाती है तो अपनी ही वात को सही सावित करने का पूर्ण प्रयास किया जाता है। अपनी ज्ञानरूपी पाखंड के पाँव तले दबे ऐसे बुद्धिजीवियों को ईश्वर सद्बुद्धि प्रदान करें । इनके जीवन का उद्देश्य ज्यादातर अपनी प्रसिद्धि हेतु गुजरता है और प्रतिफल भले ही औरों का हित हो परंतु आधार तो स्वार्थ ही होता है

 

मानव का षष्ट रंग है जो धार्मिकता का पैरोकार है खुद को धर्म की हस्ती बताकर उसकी आड़ में जधन्य से जघन्य अपराध किए जाते हैं और उनको सही ठहराने का उचित प्रयास किया जाता है है उनके अनुयायियों की संख्या अधिक हो तो समाज का निश्चित हैं।

 

संक्षिप्त में हम यह कह सकते हैं कि हर एक मानव का अपना एक अलग जीवन का उद्देश्य होता है और उसको पाने के लिए अलग-अलग पथों का चयन करता है । यह उस मनुष्य की परवरिस, उसके चारों तरफ का समाज और उस में व्याप्त रीति रिवाज तथा उसकी शिक्षा-दीक्षा पर ज्यादा ही निर्भर करता है । अतः प्रत्येक मां बाप को अपने बच्चों की परवरिश से लेकर उसके शिक्षा की जरूरतों का ख्याल उचित समय पर और उचित प्रकार से अवश्य ही किया जाना चाहिए जिससे एक स्वस्थ परिवार, स्वस्थ समाज, और अंततः एक खुशहाल राष्ट्र का निर्माण किया जा सकें ।

 

Note- उपर्युक्त विचार लेखक कें अपने है जरूरी नही है कि हरेक व्यक्ति इनसे सहमत हो, इसके लिए खेद प्रकट करता है।

 

धन्यवाद

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